करवा चौथ महत्व Importance of Karva Chauth:
विवाहित महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र और वैवाहिक सुख के लिए करवा चौथ का व्रत रखती हैं।
इस दिन निर्जला व्रत रखकर करवा माता की पूजा करने और चंद्रमा के दर्शन करने से व्रत विधिवत पूरा होता है।
करवा चौथ चंद्रोदय का समय Karwa Chauth Moonrise Time:
| Event | Date and Time |
|---|---|
| Karwa Chauth Fast Time | 6:19 AM to 8:13 PM |
| Karwa Chauth Moonrise Time | 8:13 PM |
| Chaturthi Tithi Begins | 10:54 PM, Thursday, October 9 |
| Chaturthi Tithi Ends | 7:38 PM, Friday, October 10 |
Karwa chauth का व्रत भारत में सुहागिन महिलाओं के लिए बेहद खास माना जाता है। यह व्रत पति की लंबी आयु और वैवाहिक सुख-समृद्धि के लिए रखा जाता है, साथ ही पति-पत्नी के बीच प्रेम और विश्वास को और भी गहरा करता है। इस दिन महिलाएं सूर्योदय से लेकर चंद्रमा के दर्शन तक निर्जला उपवास करती हैं, यानी पूरे दिन बिना पानी और भोजन के उपवास रखती हैं।
द्रिक पंचांग के अनुसार, कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि इस साल 9 अक्तूबर की रात 10:54 बजे से शुरू होकर 10 अक्तूबर की शाम 7:38 बजे तक रहेगी। इसका मतलब है कि करवा चौथ 2025 का व्रत 10 अक्तूबर, शुक्रवार को रखा जाएगा।
पूजा का शुभ मुहूर्त Auspicious time of puja :
इस दिन Karwa माता की पूजा का शुभ मुहूर्त शाम 5:16 बजे से लेकर शाम 6:29 बजे तक रहेगा। इस समय के दौरान पूजा करने से व्रत का फल अधिक फलदायी माना जाता है और पति-पत्नी के रिश्ते में मधुरता बढ़ती है।
करवा चौथ पर किन देवताओं की करें पूजा Which gods should be worshiped on Karva Chauth:
Karwa chauth का व्रत मुख्य रूप से माता करवा और भगवान गणेश को समर्पित होता है। इसके अलावा इस दिन भगवान शिव, माता पार्वती, कार्तिकेय देव और चंद्र देव की भी पूजा की जाती है। व्रत के अंत में चंद्रमा को जल अर्पित किया जाता है और पति के हाथ से पानी पीकर व्रत का पारण किया जाता है। मान्यता है कि चंद्र देव की पूजा करने से वैवाहिक जीवन सुखमय रहता है और पति को लंबी आयु का आशीर्वाद मिलता है। कई जगहों पर इसे करक चतुर्थी के नाम से भी जाना जाता है।
करवा चौथ पूजा विधि karva chauth puja method :
1.सुबह की तैयारी (Morning Preparation):
महिलाएँ सूर्योदय से पहले सरगी (सास द्वारा दिया गया भोजन) खाती हैं।
इसके बाद व्रत शुरू होता है — दिनभर निर्जला उपवास रखा जाता है (न कुछ खाया जाता है, न पानी पिया जाता है)।
2. स्नान और पूजा की तैयारी:
नहा-धोकर साफ कपड़े पहनें (आमतौर पर लाल या सुहाग का रंग)।
पूजा के लिए थाली में रखें —
- करवा (मिट्टी या धातु का पात्र)
- दीपक
- कुमकुम, हल्दी, चावल
- सुथनी, मिठाई
- चंद्रमा देखने के लिए छलनी
3.शाम की पूजा विधि (Evening Puja Method):
- जब चंद्रमा निकलने का समय नज़दीक हो, तब महिलाएँ एकत्र होकर पूजा करती हैं।
- गौरी माता या पार्वती माता की प्रतिमा या तस्वीर को सजाकर स्थापित करें।
- उनके सामने दीप जलाएँ और करवा चौथ कथा (Karwa Chauth Katha)सुनें।
- करवा में जल भरकर देवी को अर्पित करें।
4. कथा सुनने के बाद:
- सभी महिलाएँ एक-दूसरे को करवा देती हैं (यानी जल का पात्र बदलती हैं)।
- “जय माता दी” कहकर आरती करें।
5. चंद्र दर्शन (Moon Worship):
जब चाँद निकल जाए, तब महिलाएँ छलनी से चाँद को देखती हैं,
फिर अपने पति का चेहरा छलनी से देखकर आरती करती हैं।
इसके बाद पति अपनी पत्नी को जल या भोजन खिलाकर व्रत खोलवाता है।
करवा चौथ पूजा के लिए आवश्यक सामान (Puja Samagri List)
- करवा (जल वाला पात्र)
- मिट्टी का दीया
- छलनी
- रोली, चावल, कुमकुम, हल्दी
- मिठाई और फल
- पूजा थाली
- माता पार्वती की तस्वीर या मूर्ति
डिस्क्लेमर (अस्वीकरण)Disclaimer:
यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं और धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।












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