Bank Mega Merger:
देश के banking System में बड़ा बदलाव होने जा रहा है. सरकार छोटे-छोटे Government Bank का merger करने का प्लान बना रही है. प्राइवेटाइजेशन के बाद अब सरकार सरकारी बैंकों के मर्जर की तैयारी कर रही है. Finance minister निर्मला सीतारमण ने खुद इस बारे में बात करते हुए कहा कि देश को World class banking system की जरूरत है. Indian Banks को दुनिया के Top Banks में शामिल करने के लिए उन्हें बड़ा बनाने की कोशिश की जा रही है, जिसके लिए Government और RBI के बीच बातचीत चल रही है. सरकार सरकारी बैंकों के Mega Merger की योजना पर काम कर रही है, जिसमें छोटे सरकारी बैंकों को बड़े सरकारी बैंकों में विलय किया जा सकता है.
देश में रह सकते हैं सिर्फ 4 Government Bank
सूत्रों की माने तो छोटे बैंकों का विलय देश के 4 बड़े सरकारी बैंकों में किया जा सकता है, जिससे बड़े बैंक बन सकेंगे.
मौजूदा वक्त में देश में 12 सरकारी बैंक हैं. सरकार इन बैंकों की संख्य़ा को घटाकर 4 कर सकती है. देश में स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI), केनरा बैंक (Canra Bank), पंजाब नेशनल बैंक (PNB Bank) और बैंक ऑफ बड़ौदा (Bank of Baroda)को छोड़कर बाकी बैंकों का विलय किया जा सकता है. सूत्रों की माने तो छोटे बैंकों का विलय देश के 4 बड़े सरकारी बैंकों में किया जा सकता है, जिससे बड़े बैंक बन सकेंगे.
किन-किन बैंकों का हो सकता है मर्जर
सरकार बैंकिंग सिस्टम को मजबूत बनाने के लिए इंडियन ओवरसीज बैंक (IOB), सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया (CBI), बैंक ऑफ इंडिया (BOI), बैंक ऑफ महाराष्ट्र (BOM), यूको बैंक (UCO Bank) और पंजाब एंड सिंध बैंक (Punjab and Sind) का मर्जर बड़े बैंकों में कर सकती है.
हालांकि किस बैंक का विलय किसके साथ होगा, फिलहाल उसकी तस्वीर साफ नहीं हुई है. इस विलय से बैंक को मौजूदा ग्राहकों और कर्मचारियों पर असर होगा.
वहीं संकेत ये भी मिल रहे हैं कि यूनियन बैंक ऑफ इंडिया और इंडियन बैंक को मिलाकर देश का दूसरा सबसे बड़ा बैंक बनाया जा सकता है.
बैंक के विलय से क्या होगा असर
इन बैंकों के विलय से करोड़ों खाताधारकों और 2,29,800 कर्मचारियों पर असर होगा. भले ही सरकार दावा कर रही हो कि कर्मचारियों की नौकरियां नहीं जाएंगी लेकिन जब इन बैंकों का मर्जर होगा तो निश्चित तौर पर कई शाखाएं बंद होगी. एक ही तरह के काम करने वाले कर्मचारियों की संख्या बढ़ने से प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी, प्रमोशन से लेकर सैलरी बढ़ोतरी पर असर होगा. कर्मचारियों को ट्रांसफर का दर्द झेलना पड़ सकता है. इतना ही नहीं बैंकिंग सेक्टर में नई नौकरियों के लिए विकल्प कम हो जाएंगे.
मर्जर से सिर्फ कर्मचारी ही नहीं खाताधारकों पर भी असर होगा. मर्जर के बाद नई पासबुक, चेकबुक और नया खाता नंबर भी हो सकता है. बैंकिंग जमा, एफडी, ब्याज दर, लोन आदि पर कोई असर नहीं होगा, लेकिन ब्रांच का नाम-पता बदलने से नए चेकबुक, पासबुक के लिए बैंक की शाखा जाना पड़ सकता है.












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