News Professor

Your Favorite news

Advertisement

Navratri Kyu manate hain:Shardiya Navratri 2025 II Ghat Sthapana kya hai II Navratri की शुरुआत का इतिहास क्या है? जानें सबसे पहले नौ दिनों का व्रत किसने शुरू किया”

9 devi names

Navratri kyun manai jati hai: समझते हैं कि हम Navratri क्यों मनाते हैं और नौ दिनों तक इस पर्व को मनाने के पीछे की कहानी क्या है।

Navratri Kyu Manaya Jata hai: 

Navratri के दौरान माता दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा की जाती है. शक्ति स्वरूपा देवी दुर्गा को प्रसन्न करने के लिए साल में चार बार Navratri पड़ती हैं जिनमें एक बार शारदीय और एक बार चैत्र Navratri, इसके अलावा 2 बार गुप्त Navratri, के दौरान भक्त माता की आराधना करते हैं.Navratri में माता की पूजा-अर्चना करने का विधान सदियों से चला आ रहा है. लेकिन, क्या आप जानते हैं कि Navratri की शुरुआत कब और कैसे हुई? सबसे पहले Navratri में 9 दिनों तक व्रत किसने रखा ? अगर नहीं तो, आज हम आपको बताएंगे कि Navratri मनाने की शुरुआत कैसे हुई थी और सबसे पहले किसने Navratri का व्रत किया था.

Navratri की शुरुआत कैसे हुई? (Navratri kyu manaya jata hai)

मां दुर्गा स्वयं शक्ति स्वरूपा हैं और Navratri में सभी भक्त आध्यात्मिक शक्ति, सुख-समृद्धि की कामना करने के लिए इनकी उपासना करते हैं और व्रत रखते हैं. जिस राजा के द्वारा Navratri की शुरुआत हुई थी उन्होंने भी देवी दुर्गा से आध्यात्मिक बल और विजय की कामना की थी. वाल्मीकि रामायण में उल्लेख मिलता है कि, किष्किंधा के पास ऋष्यमूक पर्वत पर लंका की चढ़ाई करने से पहले प्रभु राम ने माता दुर्गा की उपासना की थी. ब्रह्मा जी ने भगवान राम को देवी दुर्गा के स्वरूप, चंडी देवी की पूजा करने की सलाह दी और ब्रह्मा जी की सलाह पाकर भगवान राम ने प्रतिपदा तिथि से लेकर नवमी तिथि तक चंडी देवी की उपासना और पाठ किया था.

किस राजा ने की थी नवरात्रि की शुरुआत? (How navratri is celebrated)

भगवान बह्मा ने चंडी पूजा-पाठ के साथ ही राम जी को बताया कि, आपकी पूजा तभी सफल होगी जब आप चंडी पूजा और हवन के बाद 108 नील कमल भी अर्पित करेंगे. ये नील कमल दुर्लभ माने जाते हैं. राम जी ने अपनी सेना की मदद से ये 108 नील कमल ढूंढ लिए, लेकिन जब रावण को यह पता चला कि राम चंडी देवी की पूजा कर रहे हैं और नील कमल ढूंढ रहे हैं, तो उसने अपनी मायावी शक्ति से एक नील कमल गायब कर दिया. चंडी पूजा के अंत में जब भगवान राम ने वे नील कमल चढ़ाए तो उनमें एक कमल कम निकला. यह देखकर वो चिंतित हुए और अंत में उन्होंने कमल की जगह अपनी एक आंख माता चंडी पर अर्पित करने का फैसला लिया. अपनी आंख अर्पित करने के लिए जैसे ही उन्होंने तीर उठाया तभी माता चंडी प्रकट हुईं और माता चंडी उनकी भक्ति से प्रसन्न हुईं और उन्हें विजय का आशीर्वाद दिया.

सबसे पहले किसने रखा था नवरात्रि का व्रत?

फिर प्रतिपदा से लेकर नवमी तक माता चंडी को प्रसन्न करने के लिए प्रभु श्री राम ने अन्न जल कुछ भी ग्रहण नहीं किया. नौ दिनों तक माता दुर्गा के स्वरूप चंडी देवी की उपासना करने के बाद भगवान राम को रावण पर विजय प्राप्त हुई थी. ऐसा माना जाता है कि तभी से नवरात्रि मनाने और 9 दिनों तक व्रत रखने की शुरुआत हुई. ऐसे में भगवान राम ही नवरात्रि के 9 दिनों तक व्रत रखने वाले पहले राजा और पहले मनुष्य थे.

Shardiya Navratri 2025 शारदीय नवरात्रि 2025 

शारदीय नवरात्रि 2025 की शुरुआत 22 सितंबर से हो रही है और इसका समापन 2 अक्टूबर को विजयादशमी के साथ होगा। इन नौ दिनों तक मां दुर्गा की पूजा-अर्चना करने से घर में सुख-शांति और समृद्धि का वास होता है। कुछ लोग शारदीय नवरात्रि में पूरे 9 दिनों का व्रत रखते हैं और घट-स्थापना करते हैं।

मान्यता है कि घट में देवताओं का वास माना है इसीलिए इसे शुभ और मंगलकारी माना गया है, जहां इसकी स्थापना होती है, वहां पर हमेशा सुख-शांति बनी रहती है और दुखों का प्रभाव नहीं होता है।

घट स्थापना का महत्व  Navratri में (Ghat Sthapana Significance)

नवरात्रि का शुभारंभ Ghat Sthapana से होता है, जो पूरे व्रत और पूजा को सफल बनाता है।

Ghat Sthapana से घर में सकारात्मक ऊर्जा और देवी दुर्गा की शक्ति का वास होता है। मान्यता है कि कलश में ब्रह्मा, विष्णु, महेश, नवग्रह और महासागर का वास होता है।

Ghat Sthapana की सामग्री

मिट्टी का कलश (घट) ,नारियल आम या अशोक के पत्ते ,लाल कपड़ा, जौ या गेहूं के बीज ,रोली, चावल, हल्दी जल, गंगाजल सुपारी, सिक्का मिट्टी की थाली.

Ghat Sthapana 2025 की विधि

सबसे पहले घर के पूजा स्थान को साफ करें और वहां एक चौकी पर लाल कपड़ा बिछाएं, उसके बाद चौकी पर मिट्टी की थाली रखकर उसमें जौ या गेहूं के बीज बोएं, उसके बाद अब कलश को गंगाजल और शुद्ध जल से भरें, उसमें सुपारी, सिक्का, रोली और हल्दी डालें और फिर कलश के ऊपर आम के पत्ते लगाएं और नारियल को लाल कपड़े में लपेटकर कलश पर स्थापित करें इसके बाद कलश को मिट्टी की थाली में रख दें। अब मां दुर्गा की प्रतिमा या तस्वीर के सामने दीपक जलाकर पूजा करें। देवी का आह्वान कर मंत्रों का उच्चारण करें और नौ दिनों तक अखंड ज्योति जलाए रखें।

Ghat Sthapana 2025 पर इन बातों का रखें खास ख्याल

Ghat Sthapana हमेशा शुभ मुहूर्त में ही करनी चाहिए, स्थापना के बाद नौ दिनों तक कलश के पास नियमित पूजा और आरती करनी चाहिए। अखंड ज्योति जलाने पर उसे बीच में बुझाना नहीं चाहिए। बोए गए जौ/गेहूं के अंकुरित होने को शुभ संकेत माना जाता है।

Ghat Sthapana 2025 का मुहूर्त

  • 22 सितंबर को कलश स्थापना के निम्मलिखित तीन मुहूर्त हैं.
  • सुबह 06:09 AM से 07:40 AM
  • सुबह 09:11 AM से 10:43 AM, 11:49 AM से 12:38 PM

 

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *